!! आठवण !!

सरले आता वर्ष...!
कसला आलाय हर्ष...!!
अनेक ताऱ्यांचा अस्त...!
आयुष्य किती स्वस्त...!!
तुटली नात्यांची वीण...!
जगणं झालं क्षीण...!!
हरले बालकांचे छत्र...! 
भयान काळी रात्र...!! 
राहिला नाही कर्ता...!
कुणी दिली वार्ता...!!
नाही अखेरचा निरोप...! 
कुणावर करणार आरोप...!!

बाळासाहेब भोर
क्रांतीसेना, संगमनेर

टिप्पणी पोस्ट करा

0 टिप्पण्या